आज भी जब वो वक्त यद् आता है तो लगता है वक्त थम सा गया है। कॉलेज की वो यादे , हर पल जिसे लगता था जवानी के नसे में मस्त था। उस दिन कॉलेज का आखरी दिन था हमलोग प्रेक्टिकल एक्सम दे कर बहार निकले , यहँ से सब की राहें अलग होती थी , सब को अपनी मंजिल पाने के लिये अलग होना था। ……… उस दिन हमलोग बहार निकल कर खूब आपस में गप -सप की, एक-दुसरे से गले मिले , सब का फेसबुक id लिया , सब की आँखों में अलग होने का गम झलक रहा था। सच में दोस्ती का एहसास बिछरने के बाद ही होता है। जाते - जाते एक बार जी भर के देवघर कॉलेज को देखा। कभी नहीं भूल पाउँगा

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