Saturday, August 31, 2013

आज भी जब वो वक्त यद्  आता  है तो  लगता है वक्त थम सा गया है। कॉलेज की वो यादे , हर पल जिसे लगता था जवानी के नसे में मस्त था।  उस दिन कॉलेज का आखरी दिन था हमलोग प्रेक्टिकल एक्सम दे कर बहार  निकले , यहँ  से सब की राहें अलग होती थी , सब को अपनी मंजिल पाने के लिये अलग होना था। ……… उस दिन हमलोग बहार निकल कर खूब आपस में गप -सप   की, एक-दुसरे से गले मिले , सब का फेसबुक id  लिया ,  सब की आँखों में अलग होने का गम झलक रहा था।  सच  में दोस्ती का एहसास  बिछरने के बाद ही होता है।   जाते - जाते एक बार जी भर के देवघर कॉलेज को देखा।  कभी नहीं भूल पाउँगा